Ek pagal pagal si ladki…
dil toornay se darti thi…….
har pal har lamha khud se woh jhagarti thi…
ansoo kiun aye kisi ankh
main mujrim khud ko samujhti thi…
ghuut ghuut k jeeti rehti thi…
har sans ulajhti rehti thi…
soo baar kaha aaay nadan larki..!!!
dunya ko dekhna choor day…
khud se ulajhna choor day…
pal pal bikherna choor day..
yahan HAASSASS DIl to koi nahi….
yahan NAZUKi say kaam na lay…
yahan pather banna parta hai…
yahan rehumdilli say kaam na lay…
soo barr kaha par kaisay nasamjhi…. !!!
dunya ko sub samujhti thi…
phir wohi hoa jo hona tha…..
dil toota uska jiska ussay roona tha…
BHAROSAY ki deewar girri …
SARD LEHJI haar baar mili….
phir simat gaye apni zaat main…
tamaam dukhon ko samaitay anchal main…
ankhon main jazbaat nahi..
pahlay say halaaat nahi…
Farq srif itna hoa…
khud apni zaaat ko TOOR dia…
tanhayeyoun se rishta jorr dia..
phir tanha tanha rehni lagi…
phir khud ko PATHEr kahnay lagi…
WOH IK PAGAL PAGAL SI LARKI….
JO DIL TOORNAY SE DARTI THI ……!!!!!! !!!!
Friday, December 3, 2010
Khubsoorat hain woh lub
Khubsoorat hain woh lub
Jo pyari batein kartey hain
Khubsoorat hai woh muskurahat
Jo doosron ke chehron per bhi muskan saja de
Khubsoorat hai woh dil
Jo kisi ke dard ko samjhey
Jo kisi ke dard mein tadpey
Khubsoorat hain woh jazbat
Jo kisi ka ehsaas karein
Khubsoorat hai woh ehsaas
Jo kisi ke dard ke me dawa baney
Khubsoorat hain woh batein
Jo kisi ka dil na dukhaein
Khubsoorat hain woh ansoo
Jo kisi ke dard ko mehsoos kerke beh jae
Khubsoorat hain woh hath
Jo kisi ko mushkil waqat mein tham lein
Khubsoorat hain woh kadam
Jo kisi ki madad ke liye aagey badhein !!!!!
Khubsoorat hai woh soch
Jo kisi ke liye acha sochey
Khubsoorat hai woh insan
Jis ko khuda ne ye
Khubsoorati ada ki.
Or woh khusnaseeb hai,
Jinhe aap jaise khubsoorat DOST milein
jaise aap
Jo pyari batein kartey hain
Khubsoorat hai woh muskurahat
Jo doosron ke chehron per bhi muskan saja de
Khubsoorat hai woh dil
Jo kisi ke dard ko samjhey
Jo kisi ke dard mein tadpey
Khubsoorat hain woh jazbat
Jo kisi ka ehsaas karein
Khubsoorat hai woh ehsaas
Jo kisi ke dard ke me dawa baney
Khubsoorat hain woh batein
Jo kisi ka dil na dukhaein
Khubsoorat hain woh ansoo
Jo kisi ke dard ko mehsoos kerke beh jae
Khubsoorat hain woh hath
Jo kisi ko mushkil waqat mein tham lein
Khubsoorat hain woh kadam
Jo kisi ki madad ke liye aagey badhein !!!!!
Khubsoorat hai woh soch
Jo kisi ke liye acha sochey
Khubsoorat hai woh insan
Jis ko khuda ne ye
Khubsoorati ada ki.
Or woh khusnaseeb hai,
Jinhe aap jaise khubsoorat DOST milein
jaise aap
हिचकियों
हिचकियों से एक बात का पता चलता है, कि कोई हमे याद तो करता है, बात न करे तो क्या हुआ,
कोई आज भी हम पर कुछ लम्हे बरबाद तो करता है
ज़िंदगी हमेशा पाने के लिए नही होती, हर बात समझाने के लिए नही होती, याद तो अक्सर आती है आप की,
लकिन हर याद जताने के लिए नही होती महफिल न सही तन्हाई तो मिलती है, मिलन न सही जुदाई तो मिलती है,
कौन कहता है मोहब्बत में कुछ नही मिलता, वफ़ा न सही बेवफाई तो मिलती है
कितनी जल्दी ये मुलाक़ात गुज़र जाती है
प्यास भुजती नही बरसात गुज़र जाती है
अपनी यादों से कह दो कि यहाँ न आया करे
नींद आती नही और रात गुज़र जाती है
उमर की राह मे रस्ते बदल जाते हैं,
वक्त की आंधी में इन्सान बदल जाते हैं,
सोचते हैं तुम्हें इतना याद न करें,
लेकिन आंखें बंद करते ही इरादे बदल जाते हैं कभी कभी दिल उदास होता है
हल्का हल्का सा आँखों को एहसास होता है छलकती है मेरी भी आँखों से नमी
जब तुम्हारे दूर होने का एहसास होता है
कोई आज भी हम पर कुछ लम्हे बरबाद तो करता है
ज़िंदगी हमेशा पाने के लिए नही होती, हर बात समझाने के लिए नही होती, याद तो अक्सर आती है आप की,
लकिन हर याद जताने के लिए नही होती महफिल न सही तन्हाई तो मिलती है, मिलन न सही जुदाई तो मिलती है,
कौन कहता है मोहब्बत में कुछ नही मिलता, वफ़ा न सही बेवफाई तो मिलती है
कितनी जल्दी ये मुलाक़ात गुज़र जाती है
प्यास भुजती नही बरसात गुज़र जाती है
अपनी यादों से कह दो कि यहाँ न आया करे
नींद आती नही और रात गुज़र जाती है
उमर की राह मे रस्ते बदल जाते हैं,
वक्त की आंधी में इन्सान बदल जाते हैं,
सोचते हैं तुम्हें इतना याद न करें,
लेकिन आंखें बंद करते ही इरादे बदल जाते हैं कभी कभी दिल उदास होता है
हल्का हल्का सा आँखों को एहसास होता है छलकती है मेरी भी आँखों से नमी
जब तुम्हारे दूर होने का एहसास होता है
Thursday, October 7, 2010
To A
बहते अश्को की ज़ुबान नही होती,
लफ़्ज़ों मे मोहब्बत बयां नही होती,
मिले जो प्यार तो कदर करना,
किस्मत हर कीसी पर मेहरबां नही होती.
अपने दिल को पत्थर का बना कर रखना ,
हर चोट के निशान को सजा कर रखना ।
उड़ना हवा में खुल कर लेकिन ,
अपने कदमों को ज़मी से मिला कर रखना ।
छाव में माना सुकून मिलता है बहुत ,
फिर भी धूप में खुद को जला कर रखना ।
उम्रभर साथ तो रिश्ते नहीं रहते हैं ,
यादों में हर किसी को जिन्दा रखना ।
वक्त के साथ चलते-चलते , खो ना जाना ,
खुद को दुनिया से छिपा कर रखना ।
रातभर जाग कर रोना चाहो जो कभी ,
अपने चेहरे को दोस्तों से छिपा कर रखना ।
तुफानो को कब तक रोक सकोगे तुम ,
कश्ती और मांझी का याद पता रखना ।
हर कहीं जिन्दगी एक सी ही होती हैं ,
अपने ज़ख्मों को अपनो को बता कर रखना ।
मन्दिरो में ही मिलते हो भगवान जरुरी नहीं ,
हर किसी से रिश्ता बना कर रखना |
Monday, October 4, 2010
Sunday, October 3, 2010
हाथों की रेखाएं
मेरे हाथों की रेखाएं,
तुम्हारे होने की गवाही देती हैं
जैसे मेरी मस्तिष्क रेखा....
मेरी मस्तिष्क रेखा,
तुम्हारे विचार मात्र से,
अनशन पे बैठ जाती है.
और मेरी जीवन रेखा
वो तुम्हारे घर की तरफ मुड़ी हुई है.
मेरी हृदय रेखा
तुम्हारे रहते तो जि़न्दा हैं,
पर तुम्हारे जाते ही धड़कना
बंद कर देती हैं.
बाक़ी जो इधर उधर बिखरी रेखाएं हैं
उनमें कभी मुझे
तुम्हारी आंखें नजऱ आती हैं
तो कभी तुम्हारी तिरछी नाक़.
पंडित मेरे हाथों में,
कभी अपना मनोरंजन तो कभी
अपनी कमाई खोजते हैं,
क्योंकि....
मेरे हाथों की रेखाएं
मेरा भविष्य नहीं बताती
वो तुम्हारा चेहरा बनाती हैं,
पर तुम्हें पाने की भाग्य रेखा
मेरे हाथों में नहीं है.
तुम्हारे होने की गवाही देती हैं
जैसे मेरी मस्तिष्क रेखा....
मेरी मस्तिष्क रेखा,
तुम्हारे विचार मात्र से,
अनशन पे बैठ जाती है.
और मेरी जीवन रेखा
वो तुम्हारे घर की तरफ मुड़ी हुई है.
मेरी हृदय रेखा
तुम्हारे रहते तो जि़न्दा हैं,
पर तुम्हारे जाते ही धड़कना
बंद कर देती हैं.
बाक़ी जो इधर उधर बिखरी रेखाएं हैं
उनमें कभी मुझे
तुम्हारी आंखें नजऱ आती हैं
तो कभी तुम्हारी तिरछी नाक़.
पंडित मेरे हाथों में,
कभी अपना मनोरंजन तो कभी
अपनी कमाई खोजते हैं,
क्योंकि....
मेरे हाथों की रेखाएं
मेरा भविष्य नहीं बताती
वो तुम्हारा चेहरा बनाती हैं,
पर तुम्हें पाने की भाग्य रेखा
मेरे हाथों में नहीं है.
Saturday, October 2, 2010
मेरा दिल
क्यूं रखूं मैं अब
अपनी कलम में स्याही ,
जब कोई अरमान दिल में मचलता ही
नहीं ,
जाने क्यूं सभी शक करते हैं मुझ
पर ,
जब कोई सूखा फूल मेरी
किताबों में मिलता ही नहीं ,
कशिश तो बहुत थी मेरी मोहब्बत
में ,
मगर
क्या करूँ कोई पत्थर दिल
पिघलता ही नहीं ,
खुदा मिले तो उससे अपना
प्यार मांगू ,
पर सुना है वो भी मरने से पहले
किसी से मिलता ही
नहीं ....................
अपनी कलम में स्याही ,
जब कोई अरमान दिल में मचलता ही
नहीं ,
जाने क्यूं सभी शक करते हैं मुझ
पर ,
जब कोई सूखा फूल मेरी
किताबों में मिलता ही नहीं ,
कशिश तो बहुत थी मेरी मोहब्बत
में ,
मगर
क्या करूँ कोई पत्थर दिल
पिघलता ही नहीं ,
खुदा मिले तो उससे अपना
प्यार मांगू ,
पर सुना है वो भी मरने से पहले
किसी से मिलता ही
नहीं ....................
नहीं मालूम क्यों यहाँ आया
ठोकरें खाते हुए दिन बीते ।
उठा तो पर न सँभलने पाया
गिरा व रह गया आँसू पीते ।
ताब बेताब हुई हठ भी हटी
नाम अभिमान का भी छोड़ दिया ।
देखा तो थी माया की डोर कटी
सुना व' कहते हैं, हाँ खूब किया ।
पर अहो पास छोड़ आते ही
वह सब भूत फिर सवार हुए ।
मुझे गफलत में ज़रा पाते ही
फिर वही पहले के से वार हुए ।
एक भी हाथ सँभाला न गया
और कमज़ोरों का बस क्या है ।
कहा - निर्दय, कहाँ है तेरी दया,
मुझे दुख देने में जस क्या है ।
रात को सोते य' सपना देखा
कि व' कहते हैं "तुम हमारे हो
भला अब तो मुझे अपना देखा,
कौन कहता है कि तुम हारे हो ।
अब अगर कोई भी सताये तुम्हें
तो मेरी याद वहीं कर लेना
नज़र क्यों काल ही न आये तुम्हें
प्रेम के भाव तुर्त भर लेना"
ठोकरें खाते हुए दिन बीते ।
उठा तो पर न सँभलने पाया
गिरा व रह गया आँसू पीते ।
ताब बेताब हुई हठ भी हटी
नाम अभिमान का भी छोड़ दिया ।
देखा तो थी माया की डोर कटी
सुना व' कहते हैं, हाँ खूब किया ।
पर अहो पास छोड़ आते ही
वह सब भूत फिर सवार हुए ।
मुझे गफलत में ज़रा पाते ही
फिर वही पहले के से वार हुए ।
एक भी हाथ सँभाला न गया
और कमज़ोरों का बस क्या है ।
कहा - निर्दय, कहाँ है तेरी दया,
मुझे दुख देने में जस क्या है ।
रात को सोते य' सपना देखा
कि व' कहते हैं "तुम हमारे हो
भला अब तो मुझे अपना देखा,
कौन कहता है कि तुम हारे हो ।
अब अगर कोई भी सताये तुम्हें
तो मेरी याद वहीं कर लेना
नज़र क्यों काल ही न आये तुम्हें
प्रेम के भाव तुर्त भर लेना"
वक़्त
तुमको देखा तो ये ख्याल आया,
जिन्दगी धुप तुम घना साया |
आज फिर दिल ने एक तमन्ना की,
आज फिर दिल को हमने समझाया |
तुम चले जाओगे तो सोचोगे ,
हमने क्या खोया हमने क्या पाया |
हम जिसे गुनगुना नहीं सकते,
वक़्त ने ऐसा गीत क्यों गया |
जिन्दगी धुप तुम घना साया |
आज फिर दिल ने एक तमन्ना की,
आज फिर दिल को हमने समझाया |
तुम चले जाओगे तो सोचोगे ,
हमने क्या खोया हमने क्या पाया |
हम जिसे गुनगुना नहीं सकते,
वक़्त ने ऐसा गीत क्यों गया |
प्यार
ये बता दे मुझे जिन्दगी,
प्यार की राह के हमसफ़र,
किस तरह बन गए अजनबी,
ये बता दे मुझे जिन्दगी,
फूल क्यों सारे मुरझा गए,
किस लिए बुझ गयी चादनी,
ये बता दे मुझे जिन्दगी |
कल जो बाँहों में थी,
और निगाहों में थी,
अब वो गर्मी कहाँ खो गई,
न वो अंदाज़ है,
न वो आवाज़ है,
अब वो नर्मी कहाँ खो गई,
ये बता दे मुझे जिन्दगी |
बेवफा तुम नहीं,
बेवफा हम नहीं,
फिर वो जज्बात क्यों सो गए,
प्यार तुमको भी है,
प्यार हमको भी है,
फासले फिर ये क्या हो गये,
ये बता दे मुझे जिन्दगी |
प्यार की राह के हमसफ़र,
किस तरह बन गए अजनबी,
ये बता दे मुझे जिन्दगी,
फूल क्यों सारे मुरझा गए,
किस लिए बुझ गयी चादनी,
ये बता दे मुझे जिन्दगी |
कल जो बाँहों में थी,
और निगाहों में थी,
अब वो गर्मी कहाँ खो गई,
न वो अंदाज़ है,
न वो आवाज़ है,
अब वो नर्मी कहाँ खो गई,
ये बता दे मुझे जिन्दगी |
बेवफा तुम नहीं,
बेवफा हम नहीं,
फिर वो जज्बात क्यों सो गए,
प्यार तुमको भी है,
प्यार हमको भी है,
फासले फिर ये क्या हो गये,
ये बता दे मुझे जिन्दगी |
एक जबाब अपने आप से
कभी खुद पे, कभी हालत पे रोना आया |
बात निकली तो हर बात पे रोना आया |
हम तो समझे थे की हम भूल गए उनको |
क्या हुआ आज, किस बात पे रोना आया ?
किसके लिए जीते है हम, किसके लिए जीते है ?
बारहा ऐसे सवालात पे रोना आया |
कौन रोता है किसी और की खातिर, ऐ दोस्त |
सब को अपनी ही किसी बात पे रोना आया ||
बात निकली तो हर बात पे रोना आया |
हम तो समझे थे की हम भूल गए उनको |
क्या हुआ आज, किस बात पे रोना आया ?
किसके लिए जीते है हम, किसके लिए जीते है ?
बारहा ऐसे सवालात पे रोना आया |
कौन रोता है किसी और की खातिर, ऐ दोस्त |
सब को अपनी ही किसी बात पे रोना आया ||
CONFIDENCE,TRUST AND HOPE
एक बार एक गाँव ने सोचा क्यों न हम बारिश के लिए भगवान से प्रार्थना करें| स्थान तय हुआ | सारा गाँव वहां पंहुचा पर एक बच्चा छतरी ले के पहुंचा | इसे कहते है CONFIDENCE
एक साल के बच्चे को हवा में उछाला और वो हँस रहा था क्योकि उसको विश्वास है की उसे पकड़ भी लेगा इसको कहते
है TRUST
हम रोज रात को बिस्तर सोने जाते है हमे पता भी नही की कल हमारी आँख खुलेगी भी या नही पर फिर भी हम अगले दिन की रूप रेखा बना के सोते है
इसको कहते HOPE
SO
NEVER LOSE CONFIFEDENCE, TRUST & HOPE
एक साल के बच्चे को हवा में उछाला और वो हँस रहा था क्योकि उसको विश्वास है की उसे पकड़ भी लेगा इसको कहते
है TRUST
हम रोज रात को बिस्तर सोने जाते है हमे पता भी नही की कल हमारी आँख खुलेगी भी या नही पर फिर भी हम अगले दिन की रूप रेखा बना के सोते है
इसको कहते HOPE
SO
NEVER LOSE CONFIFEDENCE, TRUST & HOPE
Friday, October 1, 2010
मेरा प्यार
साथ रोती थी मेरे साथ हंसा करती थी,
वो लड़की जो मेरे दिल में बसा करती थी,
मेरी चाहत की तलबगार थी इस दर्जे की,
वो मुसल्ले पे नामजो में दुआ करती थी ,
एक लम्हे का बिछड़ना भी गिरा था उसको,
रोते हुए मुझको खुद से जुदा करती थी,
मेरे दिल में रहा करती थी धड़कन बनकर,
और साये की तरह साथ रहा करती थी,
रोग दिल को लगा बैठी अनजाने में,
मेरी आगोश में मरने की दुआ करती थी |
वो लड़की जो मेरे दिल में बसा करती थी,
मेरी चाहत की तलबगार थी इस दर्जे की,
वो मुसल्ले पे नामजो में दुआ करती थी ,
एक लम्हे का बिछड़ना भी गिरा था उसको,
रोते हुए मुझको खुद से जुदा करती थी,
मेरे दिल में रहा करती थी धड़कन बनकर,
और साये की तरह साथ रहा करती थी,
रोग दिल को लगा बैठी अनजाने में,
मेरी आगोश में मरने की दुआ करती थी |
Wednesday, June 2, 2010
HUMANITY MY RELIGON
A few asked me which religion do u follow ... I said none. They asked me if I believe in GOD I said I do.Today I do realize that there is a new religion... taking shape already there? It is called Humanity! It is my "religion" my "revolution"!
When u rise above the conventional religion forms and merge into the higher orbit of "Humanity!"
I am not asking anyone to disrespect his/her religion! if you follow some religion fine. If we dont follow fine. The purpose here is discuss is "humanity"!
When u rise above the conventional religion forms and merge into the higher orbit of "Humanity!"
I am not asking anyone to disrespect his/her religion! if you follow some religion fine. If we dont follow fine. The purpose here is discuss is "humanity"!
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