Thursday, October 7, 2010

To A

बहते अश्को की ज़ुबान नही होती,
लफ़्ज़ों मे मोहब्बत बयां नही होती,
मिले जो प्यार तो कदर करना,
किस्मत हर कीसी पर मेहरबां नही होती.

अपने दिल को पत्थर का बना कर रखना ,
हर चोट के निशान को सजा कर रखना ।

उड़ना हवा में खुल कर लेकिन ,
अपने कदमों को ज़मी से मिला कर रखना ।

छाव में माना सुकून मिलता है बहुत ,
फिर भी धूप में खुद को जला कर रखना ।

उम्रभर साथ तो रिश्ते नहीं रहते हैं ,
यादों में हर किसी को जिन्दा रखना ।

वक्त के साथ चलते-चलते , खो ना जाना ,
खुद को दुनिया से छिपा कर रखना ।

रातभर जाग कर रोना चाहो जो कभी ,
अपने चेहरे को दोस्तों से छिपा कर रखना ।

तुफानो को कब तक रोक सकोगे तुम ,
कश्ती और मांझी का याद पता रखना ।

हर कहीं जिन्दगी एक सी ही होती हैं ,
अपने ज़ख्मों को अपनो को बता कर रखना ।

मन्दिरो में ही मिलते हो भगवान जरुरी नहीं ,
हर किसी से रिश्ता बना कर रखना |

Monday, October 4, 2010

Sunday, October 3, 2010

हाथों की रेखाएं

मेरे हाथों की रेखाएं,
तुम्हारे होने की गवाही देती हैं
जैसे मेरी मस्तिष्क रेखा....
मेरी मस्तिष्क रेखा,
तुम्हारे विचार मात्र से,
अनशन पे बैठ जाती है.
और मेरी जीवन रेखा
वो तुम्हारे घर की तरफ मुड़ी हुई है.
मेरी हृदय रेखा
तुम्हारे रहते तो जि़न्दा हैं,
पर तुम्हारे जाते ही धड़कना
बंद कर देती हैं.
बाक़ी जो इधर उधर बिखरी रेखाएं हैं
उनमें कभी मुझे
तुम्हारी आंखें नजऱ आती हैं
तो कभी तुम्हारी तिरछी नाक़.
पंडित मेरे हाथों में,
कभी अपना मनोरंजन तो कभी
अपनी कमाई खोजते हैं,
क्योंकि....
मेरे हाथों की रेखाएं
मेरा भविष्य नहीं बताती
वो तुम्हारा चेहरा बनाती हैं,
पर तुम्हें पाने की भाग्य रेखा
मेरे हाथों में नहीं है.

Saturday, October 2, 2010

मेरा दिल

क्यूं रखूं मैं अब
अपनी कलम में स्याही ,
जब कोई अरमान दिल में मचलता ही
नहीं ,
जाने क्यूं सभी शक करते हैं मुझ
पर ,
जब कोई सूखा फूल मेरी
किताबों में मिलता ही नहीं ,
कशिश तो बहुत थी मेरी मोहब्बत
में ,
मगर
क्या करूँ कोई पत्थर दिल
पिघलता ही नहीं ,
खुदा मिले तो उससे अपना
प्यार मांगू ,
पर सुना है वो भी मरने से पहले
किसी से मिलता ही
नहीं ....................
नहीं मालूम क्यों यहाँ आया
ठोकरें खाते हु‌ए दिन बीते ।
उठा तो पर न सँभलने पाया
गिरा व रह गया आँसू पीते ।



ताब बेताब हु‌ई हठ भी हटी
नाम अभिमान का भी छोड़ दिया ।
देखा तो थी माया की डोर कटी
सुना व' कहते हैं, हाँ खूब किया ।



पर अहो पास छोड़ आते ही
वह सब भूत फिर सवार हु‌ए ।
मुझे गफलत में ज़रा पाते ही
फिर वही पहले के से वार हु‌ए ।



एक भी हाथ सँभाला न गया
और कमज़ोरों का बस क्या है ।
कहा - निर्दय, कहाँ है तेरी दया,
मुझे दुख देने में जस क्या है ।



रात को सोते य' सपना देखा
कि व' कहते हैं "तुम हमारे हो
भला अब तो मुझे अपना देखा,
कौन कहता है कि तुम हारे हो ।



अब अगर को‌ई भी सताये तुम्हें
तो मेरी याद वहीं कर लेना
नज़र क्यों काल ही न आये तुम्हें
प्रेम के भाव तुर्त भर लेना"

वक़्त

तुमको देखा तो ये ख्याल आया,
जिन्दगी धुप तुम घना साया |

आज फिर दिल ने एक तमन्ना की,
आज फिर दिल को हमने समझाया |

तुम चले जाओगे तो सोचोगे ,
हमने क्या खोया हमने क्या पाया |

हम जिसे गुनगुना नहीं सकते,
वक़्त ने ऐसा गीत क्यों गया |




प्यार

ये बता दे मुझे जिन्दगी,
प्यार की राह के हमसफ़र,
किस तरह बन गए अजनबी,
ये बता दे मुझे जिन्दगी,
फूल क्यों सारे मुरझा गए,
किस लिए बुझ गयी चादनी,
ये बता दे मुझे जिन्दगी |

कल जो बाँहों में थी,
और निगाहों में थी,
अब वो गर्मी कहाँ खो गई,
न वो अंदाज़ है,
न वो आवाज़ है,
अब वो नर्मी कहाँ खो गई,
ये बता दे मुझे जिन्दगी |

बेवफा तुम नहीं,
बेवफा हम नहीं,
फिर वो जज्बात क्यों सो गए,
प्यार तुमको भी है,
प्यार हमको भी है,
फासले फिर ये क्या हो गये,
ये बता दे मुझे जिन्दगी |








एक जबाब अपने आप से

कभी खुद पे, कभी हालत पे रोना आया |
बात निकली तो हर बात पे रोना आया |
हम तो समझे थे की हम भूल गए उनको |
क्या हुआ आज, किस बात पे रोना आया ?
किसके लिए जीते है हम, किसके लिए जीते है ?
बारहा ऐसे सवालात पे रोना आया |
कौन रोता है किसी और की खातिर, ऐ दोस्त |
सब को अपनी ही किसी बात पे रोना आया ||

CONFIDENCE,TRUST AND HOPE

एक बार एक गाँव ने सोचा क्यों न हम बारिश के लिए भगवान से प्रार्थना करें| स्थान तय हुआ | सारा गाँव वहां पंहुचा पर एक बच्चा छतरी ले के पहुंचा | इसे कहते है CONFIDENCE

एक साल के बच्चे को हवा में उछाला और वो हँस रहा था क्योकि उसको विश्वास है की उसे पकड़ भी लेगा इसको कहते
है TRUST


हम रोज रात को बिस्तर सोने जाते है हमे पता भी नही की कल हमारी आँख खुलेगी भी या नही पर फिर भी हम अगले दिन की रूप रेखा बना के सोते है
इसको कहते HOPE

SO
NEVER LOSE CONFIFEDENCE, TRUST & HOPE

Friday, October 1, 2010

मेरा प्यार

साथ रोती थी मेरे साथ हंसा करती थी,
वो लड़की जो मेरे दिल में बसा करती थी,
मेरी चाहत की तलबगार थी इस दर्जे की,
वो मुसल्ले पे नामजो में दुआ करती थी ,
एक लम्हे का बिछड़ना भी गिरा था उसको,
रोते हुए मुझको खुद से जुदा करती थी,
मेरे दिल में रहा करती थी धड़कन बनकर,
और साये की तरह साथ रहा करती थी,
रोग दिल को लगा बैठी अनजाने में,
मेरी आगोश में मरने की दुआ करती थी |