साथ रोती थी मेरे साथ हंसा करती थी,
वो लड़की जो मेरे दिल में बसा करती थी,
मेरी चाहत की तलबगार थी इस दर्जे की,
वो मुसल्ले पे नामजो में दुआ करती थी ,
एक लम्हे का बिछड़ना भी गिरा था उसको,
रोते हुए मुझको खुद से जुदा करती थी,
मेरे दिल में रहा करती थी धड़कन बनकर,
और साये की तरह साथ रहा करती थी,
रोग दिल को लगा बैठी अनजाने में,
मेरी आगोश में मरने की दुआ करती थी |
1 comment:
this is so goodddddddd
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